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THE METRO MAN – E SREEDHARAN – INDIAN ENGINEER OF 21sr CENTURY

A legend hangs up his boots On the last day of this month . Finally, Elattuvalapil Sreedharan has been allowed to retire, at the age of 79. A man who built the Calcutta Metro, Konkan Railway and the Delhi Metro. But he is best remembered for re-building in just 46 days the Pamban bridge which in 1963 was blown away by a cyclone into the sea.

Here is a man who is honest to the core, brooked no nonsense and set an example for others. A true leader who walked his talk. He truly deserves the Bharat Ratna. Now he is going to Kerala to fulfill the dreams of Mallus "The Kochin Metro "

India has much gratitude for this great engineer. He is known as the The "metro man of India". He is quite a sensational project manager, who almost always gets the project completed on time or before schedule. He fought all the delays caused by bureaucratic red tape, corruption and lack of funds.
Sreedharan’s willpower has moved mountains. He is not just a dreamer but also a builder, but most of all, one who has dedicated his achievements to every Indian. He stands out as a legend in Indian Engineering history. His major projects being the Delhi Metro and the Konkan Railways.

This 75+ year-old Managing Director of the Delhi Metro Rail Corporation only desires the progress of his country. He wanted Delhi to have a world-class metro rail project to change the meaning of urban transport in India. And he did it.

The Konkan Railway project came to him in his retirement. It was a challenging task—-760 km of rail tracks from Mumbai to Kochi through the rugged hills of the Western Ghats. This project was found as not feasible, by the British engineers in pre-independence era. But for Sreedharan nothing was impossible.

Environmentalists protested, politicians said it cannot be done and the project ran short of money.
Sreedharan raised public bonds to finance it, taking everyone ahead.

Kiran Bedi explains why Sreedharan is worthy of the title: “He is not in his 40s or 50s, but he is in his 70s, a time when we normally retire. Sreedharan has given the best metro concept for the railway of the country with integrity, vision, with commitment and with remarkable professional skills. There is no other person better than him in this category.”

Sreedharan insists he does not have any special skills to get the best out of people. "I always found that people cooperate if you work for a good cause," he says.

Sreedharan studied in an ordinary school & college and later on took his civil engineering degree from a govt engineering college. But he went on to become the boss for hundreds of IIM, IIT graduates!

People still wonder what really makes him tick at 80 while a young man in his 20’s struggles to begin his day at 6 or 7 in the morning. Sreedharan’s day starts at 4 am, meditation and Bhagwad Gita.

He reaches office at 9:30 am and gets straight to work. In the evening, he usually takes a long walk with his wife Radha and allots time to his family of four children. He used to set up reverse clocks to show impending deadlines to his project members during Delhi Metro construction phase.
The message of the Gita: To act, without desire for the fruits of the action gave him the courage to act.

A plate placed in his Kerala office read as: ‘Whatever to be done, I do. But in reality I do not do anything’.

India says thank you sir.
Government of India may or may not award him the Bharat Ratna. But for the countless millions that have travelled on the Pamban bridge, Kolkata Metro, Konkan Railways & Delhi Metro and for the knowledgeable public he is already a Bharat Ratna – a real gem of the rarest variety.

Let’s all recommend his name to Govt for award of Bharat Ratna. Please share this message. Each one to at least one.

ASHOKA THE GREAT – MUST KNOW FACTS

चीन के जिजीयांग स्टेट में अशोक स्तम्भ आज भी मौजूद है ! चीन के लोगों को चक्रवर्ती अशोक की महानता और वीरता की कथाएं पता है । भारत के?
👉कपने सोचा कि जिस सम्राट के नाम के साथ संसार भर के इतिहासकार “महान” शब्द लगाते हैं……
🚥🚥🚥🚥🚥🚥🚥🚥🚥 👉जिस सम्राट का राज चिन्ह अशोक चक्र भारत देश अपने झंडे में लगाता है…..
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👉 जिस सम्राट का राज चिन्ह चारमुखी शेर को भारत देश राष्ट्रीय प्रतीक मानकर सरकार चलाती है…
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👉जिस देश में सेना का सबसे बड़ा युद्ध सम्मान सम्राट अशोक के नाम पर अशोक चक्र दिया जाता है…
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👉जिस सम्राट से पहले या बाद में कभी कोई ऐसा राजा या सम्राट नहीं हुआ, जिसने अखंड भारत (आज का नेपाल, बांग्लादेश, पूरा भारत, पाकिस्तान और अफगानिस्तान) जितने बड़े भूभाग पर एक छत्रीय राज किया हो….
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👉जिस सम्राट के शासन काल को विश्व के बुद्धिजीवी और इतिहासकार भारतीय इतिहास का सबसे स्वर्णिम काल मानते हैं….
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👉जिस सम्राट के शासन काल में भारत विश्व गुरु था, सोने की चिड़िया था, जनता खुशहाल और भेदभाव रहित थी…..
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👉जिस सम्राट के शासन काल में जी टी रोड जैसे कई हाईवे बने, पूरे सड़क पर पेड़ लगाये गए, सराये बनायीं गईं। इंसान तो इंसान जानवरों के लिए भी प्रथम बार अस्पताल खोले गए, जानवरों को मारना बंद कर दिया गया…..
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👉 ऐसे महान सम्राट अशोक कि जयंती उनके अपने ही देश भारत में क्यों नहीं मनायी जाती, न ही कोई छुट्टी घोषित कि गई है?? ~~~~~
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👉अफ़सोस जिन लोगों को ये जयंती मनानी चाहिए, वो लोग अपना इतिहास ही नहीं जानते और जो जानते हैं वो मानना नहीं चाहते ।
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👉जो जीता वही चंद्रगुप्त ना होकर, जो जीता वही सिकन्दर “कैसे” हो गया??? जबकि सिकंदर की सेना ने चन्द्रगुप्त मौर्य के प्रभाव को देखते हुये लड़ने से मना कर दिया था और उसका मनोबल टूट गया, जिस के कारण सिकंदर ने मित्रता के तौर पर अपने सेनापति सेल्युकश कि बेटी की शादी चन्द्रगुप्त से की थी। ~~~~~
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👉महाराणा प्रताप महान ना होकर अकबर महान कैसे हो गया???जबकि, अकबर अपने हरम में हजारों लड़कियों को रखैल के तौर पर रखता था। यहाँ तक कि उसने अपनी बेटियो और बहनो की शादी तक पर प्रतिबँध लगा दिया था। और इधर हम उस महान योद्धा महाराणा प्रताप को भूल गए जिसने अकेले दम पर उस अकबर की लाखों की सेना को घुटनों पर ला दिया था।
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👉सवाई जय सिंह को महान वास्तुप्रिय राजा ना कहकर शाहजहाँ को यह उपाधि किस आधार मिली??? जबकि साक्ष्य बताते हैं कि जयपुर के हवा महल और कई किले महाराजा जय सिंह ने बनवाया था और मुगलो ने यहाँ के मंदिरो और महलो पर जबरन कब्ज़ा कर के उनको अपनी कृति घोषित किया था। ~~~~~
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👉जो स्थान गुरु गोबिंद सिंह जी को मिलना चाहिये वो क्रूर और आतंकी औरंगजेब को क्यों और कैसे मिल गया ???? ~~~~~
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👉स्वामी विवेकानंद और आचार्य चाणक्य को भूल गए और हिंदुत्व विरोधी गांधी महात्मा बनकर हिंदुस्तान के राष्ट्रपिता कैसे हो गये ????? ~
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👉 तेजोमहालय हो गया ताजमहल, लालकोट हुआ लाल किला, फतेहपुर सीकरी का देव महल- बुलन्द दरवाजा एवं सुप्रसिद्ध गणितज्ञ वराह मिहिर की मिहिरावली(महरौली) स्थित वेधशाला हो गयी कुतुबमीनार, क्यों और कैसे हो गया???? ~~~~~
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👉यहाँ तक कि राष्ट्रीय गान भी संस्कृत के "वन्दे मातरम" की जगह गुलामी का प्रतीक ”जन-गण-मन" ..कैसे और क्यों हो गया ????
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👉और तो और…. हमारे आराध्य भगवान् राम और कृष्ण इतिहास से कहाँ और कब गायब हो गये, पता ही नहीं चला, आखिर कैसे ????
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👉 यहाँ तक कि हमारे आराध्य भगवान राम और कृष्ण की जन्मभूमि भी कब और कैसे विवादित बन गयी, हमें पता हीं नही चला!
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👉हमारे दुश्मन सिर्फ बाबर , गजनवी , तैमूरलंग ही नहीं हैं,बल्कि आज के सफेदपोश सेक्यूलर भी हमारे उतने ही बड़े दुश्मन हैं, जिन्होंने हीन भावना का उदय कर दिया। ~~~~~
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👉🏾अपन सच्चे इतिहास को जानने और पहचाने के लिए अतिशय धन्यवाद।
🙏जय नारायण जी की सरकार 🚩

AAJ KA BHARAT AUR MAHABHARAT

*दुर्योधन और राहुल गांधी* –
दोनों ही अयोग्य होने पर भी सिर्फ राजपरिवार में पैदा होने के कारन शासन पर अपना अधिकार समझते हैं।

*भीष्म और आडवाणी* –
कभी भी सत्तारूढ़ नही हो सके फिर भी सबसे ज्यादा सम्मान मिला। उसके बाद भी जीवन के अंतिम पड़ाव पे सबसे ज्यादा असहाय दिखते हैं।

*अर्जुन और नरेंद्र मोदी*-
दोनों योग्यता से धर्मं के मार्ग पर चलते हुए शीर्ष पर पहुचे जहाँ उनको एहसास हुआ की धर्म का पालन कर पाना कितना कठिन होता है।

*कर्ण और मनमोहन सिंह* –
बुद्धिमान और योग्य होते हुए भी अधर्म का पक्ष लेने के कारण जीवन में वांछित सफलता न पा सके।

*जयद्रथ और केजरीवाल*-
दोनों अति महत्वाकांक्षी एक ने अर्जुन का विरोध किया दूसरे ने मोदी का। हालांकि इनको राज्य तो प्राप्त हुआ लेकिन घटिया राजनीतिक सोच के कारण बाद में इनकी बुराई और मौत ही हुयी।

*शकुनि और दिग्विजय-*
दोनों ही अपने स्वार्थ के लिए अयोग्य मालिको की जीवनभर चाटुकारिता करते रहे।

*धृतराष्ट्र और सोनिया* –
अपने पुत्र प्रेम में अंधे है।

*श्रीकृष्ण और कलाम-*
भारत में दोनों को बहुत सम्मान दिया जाता है परन्तु न उनकी शिक्षाओं को कोई मानता है और न उनके बताये रास्ते का अनुसरण करता है।

–यह है *भारत और महाभारत*

BENIFITS OF BLOOD DONATION

*ब्लड डोनेशन में दूसरों के साथ अपना फायदा भी*

💉ब्लड डोनेशन को लेकर सरकार की नीति स्पष्ट न होने के चलते बहुत से लोगों के मन में ब्लड डोनेशन को लेकर दुविधा बनी रहती है। ब्लड डोनेट करना क्यों जरूरी है और जरूरत पड़ने पर क्या करें, बता रहे हैं मित्र:

क्यों है जरूरी

💉 ब्लड डोनेट कर एक शख्स दूसरे शख्स की जान बचा सकता है।

💉 ब्लड का किसी भी प्रकार से उत्पादन नहीं किया जा सकता और न ही इसका कोई विकल्प है।

💉 देश में हर साल लगभग 250 सीसी की 4 करोड़ यूनिट ब्लड की जरूरत पड़ती है। सिर्फ 5,00,000 यूनिट ब्लड ही मुहैया हो पाता है।

💉 हमारे शरीर में कुल वजन का 7% हिस्सा खून होता है।

💉 आंकड़ों के मुताबिक 25 प्रतिशत से अधिक लोगों को अपने जीवन में खून की जरूरत पड़ती है।

*क्या हैं फायदे*

💉 ब्लड डोनेशन से हार्ट अटैक की आशंका कम हो जाती है। डॉक्टर्स का मानना है कि डोनेशन से खून पतला होता है, जो कि हृदय के लिए अच्छा होता है।

💉 एक नई रिसर्च के मुताबिक नियमित ब्लड डोनेट करने से कैंसर व दूसरी बीमारियों के होने का खतरा भी कम हो जाता है, क्योंकि यह शरीर में मौजूद विषैले पदार्थों को बाहर निकालता है।

💉 ब्लड डोनेट करने के बाद बोनमैरो नए रेड सेल्स बनाता है। इससे शरीर को नए ब्लड सेल्स मिलने के अलावा तंदुरुस्ती भी मिलती है।

💉 ब्लड डोनेशन सुरक्षित व स्वस्थ परंपरा है। इसमें जितना खून लिया जाता है, वह 21 दिन में शरीर फिर से बना लेता है। ब्लड का वॉल्यूम तो शरीर 24 से 72 घंटे में ही पूरा बन जाता है।

*ब्लड डोनेट करने से पहले*
💉ब्लड देने से पहले मिनी ब्लड टेस्ट होता है, जिसमें हीमोग्लोबिन टेस्ट, ब्लड प्रेशर व वजन लिया जाता है। ब्लड डोनेट करने के बाद इसमें हेपेटाइटिस बी व सी, एचआईवी, सिफलिस व मलेरिया आदि की जांच की जाती है। इन बीमारियों के लक्षण पाए जाने पर डोनर का ब्लड न लेकर उसे तुरंत सूचित किया जाता है।

💉 ब्लड की कमी का एकमात्र कारण जागरूकता का अभाव है।

💉 18 साल से अधिक उम्र के स्त्री-पुरुष, जिनका वजन 50 किलोग्राम या अधिक हो, वर्ष में तीन-चार बार ब्लड डोनेट कर सकते हैं।

💉 ब्लड डोनेट करने योग्य लोगों में से अगर मात्र 3 प्रतिशत भी खून दें तो देश में ब्लड की कमी दूर हो सकती है। ऐसा करने से असमय होने वाली मौतों को रोका जा सकता है।

💉 ब्लड डोनेट करने से पहले व कुछ घंटे बाद तक धूम्रपान से परहेज करना चाहिए।

💉 ब्लड डोनेट करने वाले शख्स को रक्तदान के 24 से 48 घंटे पहले ड्रिंक नहीं करनी चाहिए।

💉 ब्लड डोनेट करने से पहले पूछे जाने वाले सभी प्रश्नों के सही व स्पष्ट जवाब देना चाहिए।

*नोट:*
ब्लड डोनेट करने के बाद आप पहले की तरह ही कामकाज कर सकते हैं। इससे शरीर में किसी भी तरह की कमी नहीं होती।

💉इस मैसेज को हर आदमी व हर ग्रुप में पहुचाऎ ताकि रक्तदान करने वालो की गलतफहमी दूर हो सके तथा रक्तदान नहीं करने वाले भी ज्यादा से ज्यादा रक्तदान करके खुद भी स्वस्थ रहे तथा कई लोगों की जान बचा सके|

_मौका दीजिये अपने खून को, किसी की रगों में बहने का……_

_ये लाजवाब तरीका है , कई जिस्मों में ज़िंदा रहने का……._

❣❣❣

💉 *ब्लड ग्रुप की तुलना*

*Compatible Blood Types*

O- ले सकता है O-

O+ ले सकता है O+, O-

A- ले सकता है A-, O-

A+ले सकता है A+, A-,O+,O-

B- ले सकता है B-, O-

B+ ले सकता है B+,B-,O+,O-

AB-ले सकता है AB-,B-,A-,O-

AB+ ले सकता है AB+, AB-, B+, B-, A+, A-, O+, O-

💉ये एक महत्वपूर्ण मेसेज है जो किसी की जिंदगी बचा सकता है …💉
*🙏🏻…Donate blood …🙏🏻*

KAVI GOPAL DAS BEERAJ – KUCH SAPNO K MAR JAANE SE JIVAN NAHI MARA KARTA

*गोपालदास ‘नीरज’ जी’* की एक बेमिसाल रचना *☞*
छिप-छिप अश्रु बहाने वालो,
मोती व्यर्थ लुटाने वालों;
कुछ सपनों के मर जाने से
जीवन नहीं मरा करता है।
सपना क्या है? नयन-सेज पर,
सोया हुआ आँख का पानी।
और टूटना है उसका ज्यों,
जागे कच्ची नींद जवानी॥
गीली उमर बनाने वालो,
डूबे बिना नहाने वालो।
कुछ पानी के बह जाने से
सावन नहीं मरा करता है॥
माला बिखर गयी तो क्या है,
खुद ही हल हो गयी समस्या।
आँसू गर नीलाम हुए तो,
समझो पूरी हुई तपस्या॥
रूठे दिवस मनाने वालो,
फटी क़मीज़ सिलाने वालो।
कुछ दीपों के बुझ जाने से,
आँगन नहीं मरा करता है॥
खोता कुछ भी नहीं यहाँ पर,
केवल जिल्द बदलती पोथी।
जैसे रात उतार चाँदनी,
पहने सुबह धूप की धोती॥
वस्त्र बदलकर आने वालो,
चाल बदलकर जाने वालो।
चन्द खिलौनों के खोने से,
बचपन नहीं मरा करता है॥
लाखों बार गगरियाँ फूटीं,
पर न शिकन आयी पनघट पर।
लाखों बार कश्तियाँ डूबीं,
चहल-पहल वो ही है तट पर॥
तम की उमर बढ़ाने वालो,
लौ की आयु घटाने वालो।
लाख करे पतझर कोशिश
पर,उपवन नहीं मरा करता है॥
लूट लिया माली ने उपवन,
लुटी न लेकिन गन्ध फूल की।
तूफ़ानों तक ने छेड़ा पर,
खिड़की बन्द न हुई धूल की॥
नफ़रत गले लगाने वालो,
सब पर धूल उड़ाने वालो।
कुछ मुखड़ों की नाराज़ी से,
दर्पन नहीं मरा करता है॥
कुछ सपनों के मर जाने से जीवन नहीं मरा करता है॥

Must know about A P J ABDUL KALAM

*Mr. PM Nair IAS (Secretary to the President of India) on Late DR. APJ Abdul Kalam*
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WE SHALL NOT SEE ANOTHER APJ ABDUL KALAM LIKE OUR LATE PRESIDENT :

DD Podhigai telecast an interview with Mr P M Nair retired IAS officer who was the secretary to Dr Kalam Sir when he was the President. I summarise the points he spoke in voice choked with emotion. Mr Nair authored a book titled *"Kalam Effect"*

1. Dr Kalam used to receive costly gifts whenever he went abroad as it is customary for many nations to give gifts to the visiting Head of state. Refusing the gift would become an insult to the nation and an embarrassment for India. So, he received them and on his return, Dr Kalam asked the gifts to be photographed and then catalogued and handed over to the archives. Afterwards, he never even looked at them. He did not take even a pencil from the gifts received when he left Rashtrapathi Bhavan.

2. In 2002, the year Dr Kalam took over, the Ramadan month came in July-August. it was a regular practice for the President to host an iftar party. Dr Kalam asked Mr Nair why he should host a party to people who are already well fed and asked him to find out how much would be the cost. Mr Nair told it costs around Rs. 22 lakhs. Dr Kalam asked him to donate that amount to a few selected orphanages in the form of food, dresses and blankets. The selection of orphanages was left to a team in Rashtrapathi Bhavan and Dr Kalam had no role in it. After the selection was made, Dr Kalam asked Mr Nair to come inside his room and gave him a cheque for Rs 1 lakh. He said that he is giving some amount from his personal savings and this should not be informed to anyone. Mr Nair was so shocked that he said "sir, I will go outside and tell everyone . People should know that here is a man who not only donated what he should have spent but he is giving his own money also". Dr Kalam though he was a devout Muslim did not have Iftar parties in the years in which he was the President.

3. Dr Kalam did not like "yes sir" type of people. Once when the Chief Justice of India had come and on some point Dr Kalam expressed his view and asked Mr Nair, "Do you agree?" Mr Nair said "No sir, i do not agree with you".

The Chief Justice was shocked and could not believe his ears. It was impossible for a civil servant to disagree with the president and that too so openly. Mr Nair told him that the President would question him afterwards why he disagreed and if the reason was logical 99% he would change his mind.

4. Dr Kalam invited 50 of his relatives to come to Delhi and they all stayed in Rashtrapathi Bhavan. He organised a bus for them to go around the city which was paid for by him. No official car was used. All their stay and food was calculated as per the instructions of Dr Kalam and the bill came to Rs 2 lakhs which he paid. In the history of this country no one has done it.

Now, wait for the climax, Dr Kalam’s elder brother stayed with him in his room for the entire one week as Dr Kalam wanted his brother to stay with him. When they left, Dr Kalam wanted to pay rent for that room also. Imagine a President of country paying rent for the room in which he is staying. This was any way not agreed by the staff who thought the honesty was getting too much to handle !!!.

5. When Kalam sir was to leave Rashtrapathi Bhavan at the end of the tenure, every staff member went and met him and paid their respects. Mr Nair went to him alone as his wife had fractured her leg and was bed ridden. Dr Kalam asked why his wife did not come. He replied that she was in bed due to an accident. next day, Mr.Nair saw lot of police men around his house and asked what had happened. They said that the President of India was coming to visit him in his house. He came and met his wife and chatted for some time. Mr Nair says that no president of any country would visit a civil servant’s house and that too on such a simple pretext.

I thought I should give the details as many of you may not have seen the telecast and so it may be useful.

The younger brother of AJP Abdul Kalam runs an Umbrella repairing shop. When Mr. Nair met him during Kalam Funeral, he touched his feet, in token of respect for both Mr. Nair and Brother.

Such information should be widely shared on social media as Main stream media will not show this because it doesn’t carries th[truncated by WhatsApp]

POEM ON KASHMIR

Dear Kashmiri brothers and sisters,

I have very emotional connection with Kashmir. Many of my Kashmiri friends taught me Urdu which is assimilated in my poems the same way as Kashmir is assimilated in India. I am still in touch with them and rejoice the golden memories spent together but recent violence in the valley has caused equally pain to me as well. I am really concerned about your life and well being but soldiers too have families and human rights. Can anyone please empathize with them?

I saw due to pellets firing by our soldiers eyes of some people got injured and politicians are talking about replacing them very soon. Don’t you think those who want to save their eyes can stay away from stone pelting on armed forces personnel? Please remember they are the people who saved us from many calamities. I think you are heartily grateful for that but unfortunately you don’t express it. If you don’t like my post then you can throw stones on me or kill me as well because one part of my life is already dying with each day when I see violence in Kashmir valley. (If seriously you are thinking about that then my current address is mentioned in my profile). Please love your life, love your nation India, I love you and I am sure every Indian loves you. My poetic request to you all-
(including those very few who are highly misguided and brainwashed to act against India)-

मोहब्बतों की मुहीम चलो स्वीकार करते हैं?
चलो हम प्यार करते हैं,चलो हम प्यार करते हैं।

ये पंडित,वो ग्रंथी, ये काज़ी,वो कसाई,
मैं हिंदू,तू मुस्लिम,ये सिख,वो ईसाई,
छोड़ो! ये बांटने की बातें सियासतगार करते हैं,
चलो हम प्यार करते हैं,चलो हम प्यार करते हैं।

किसने बांटी जात,किसने बाँटा देश?
मासूम बच्चों में किसने फैलाया द्वेष?
छोड़ो! पुराने शिकवे नया कुछ यार करते हैं,
चलो हम प्यार करते हैं,चलो हम प्यार करते हैं।

नफरत का नुक़सान सबने देखा बाकायदा,
बहाए गए खून से किसका हुआ फायदा?
कल को भूल नए कल पर सोच-विचार करते हैं,
चलो हम प्यार करते हैं,चलो हम प्यार करते हैं।
©डीजे


कवि परिचय
नाम-दिनेश कुमार ‘डीजे’
जन्म तिथि – 10.07.1987

सम्प्रति-1. भारतीय वायु सेना में नॉन कमीशंड ऑफिसर के तौर पर सेवानिवृत्त
2. भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान, रुड़की में शोध अध्येता।

शिक्षा- १. विश्वविद्यालय अनुदान आयोग द्वारा कनिष्ठ शोध छात्रवृत्ति एवं राष्ट्रीय पात्रता परीक्षा उत्तीर्ण
२. समाज कार्य में स्नातकोत्तर एवं स्नातक उपाधि
३. योग में स्नातकोत्तर उपाधिपत्र

प्रकाशित पुस्तकें – दास्तान ए ताऊ, कवि की कीर्ति एवं प्रेम की पोथी

पता- हिसार (हरियाणा)- 125001

फेसबुक पेज- facebook.com/kaviyogidjblog
फेसबुक प्रोफाइल- facebook.com/kaviyogidj
यू ट्यूब चैनल- https://m.youtube.com/channel/UCKhuRV7UuKbtkB_qRKRbX7g

ABCD …. Z of happiness

Alphabetic advice for you:

A B C
Avoid Boring Company..

D E F
Don’t Entertain Fools..

G H I
Go for High Ideas .

J K L M
Just Keep a friend like ME..

N O P
Never Overlook the Poor n suffering..

Q R S
Quit Reacting to Silly tales..

T U V
Tune Urself for ur Victory..

W X Y Z
We Xpect You to Zoom ahead in life

Very ….beautiful lines pls store it.

ONE Good FRIEND is equal to ONE Good Medicine. . .

Likewise ONE Good Group is equal to ONE Full medical store…

Six Best Doctors in the World-
1.Sunlight 2.Rest 3.Exercise 4.Diet
5.Self Confidence & 6.Friends

Maintain them in all stages of Life and enjoy healthy life

If you see the moon ….. You see the beauty of God …..
If you see the Sun ….. You see the power of God ….. And ….
If you see the Mirror. You see the best Creation of GOD .

So Believe in YOURSELF. We all are tourists & God is our travel agent who has already fixed all our Routes Reservations & Destinations
So!
Trust him & Enjoy the "Trip" called LIFE…

Our aim in life should be
9 8 7 6 5 4 3 2 1 0

🔹9-glass drinking water.
🔹8-hrs sound sleep.
🔹7-wonders tour with family.
🔹6-days work a week.
🔹5-digit income
🔹4-wheeler.
🔹3-bedroom flat or house
🔹2-cute children.
🔹1-sweetheart.
🔹0-tension!

One Life will never come Again. .. .Live Today. . .
Share to all people who are important to you ..

TEN LIFE MANTRAS BY KHUSGWANT SINGH

*खुशवंत सिंह* के लिखे ज़िंदगी के दस सूत्र ।
इन दसों सूत्रों को पढ़ने के बाद पता चला कि सचमुच खुशहाल ज़िंदगी और शानदार मौत के लिए ये सूत्र बहुत ज़रूरी हैं।

1. *अच्छा स्वास्थ्य* – अगर आप पूरी तरह स्वस्थ नहीं हैं, तो आप कभी खुश नहीं रह सकते। बीमारी छोटी हो या बड़ी, ये आपकी खुशियां छीन लेती हैं।

2. *ठीक ठाक बैंक बैलेंस* – अच्छी ज़िंदगी जीने के लिए बहुत अमीर होना ज़रूरी नहीं। पर इतना पैसा बैंक में हो कि आप आप जब चाहे बाहर खाना खा पाएं, सिनेमा देख पाएं, समंदर और पहाड़ घूमने जा पाएं, तो आप खुश रह सकते हैं। उधारी में जीना आदमी को खुद की निगाहों में गिरा देता है।

3. *अपना मकान* – मकान चाहे छोटा हो या बड़ा, वो आपका अपना होना चाहिए। अगर उसमें छोटा सा बगीचा हो तो आपकी ज़िंदगी बेहद खुशहाल हो सकती है।

4. *समझदार जीवन साथी* – जिनकी ज़िंदगी में समझदार जीवन साथी होते हैं, जो एक-दूसरे को ठीक से समझते हैं, उनकी ज़िंदगी बेहद खुशहाल होती है, वर्ना ज़िंदगी में सबकुछ धरा का धरा रह जाता है, सारी खुशियां काफूर हो जाती हैं। हर वक्त कुढ़ते रहने से बेहतर है अपना अलग रास्ता चुन लेना।

5. *दूसरों की उपलब्धियों से न जलना* – कोई आपसे आगे निकल जाए, किसी के पास आपसे ज़्यादा पैसा हो जाए, तो उससे जले नहीं। दूसरों से खुद की तुलना करने से आपकी खुशियां खत्म होने लगती हैं।

6. *गप से बचना* – लोगों को गपशप के ज़रिए अपने पर हावी मत होने दीजिए। जब तक आप उनसे छुटकारा पाएंगे, आप बहुत थक चुके होंगे और दूसरों की चुगली-निंदा से आपके दिमाग में कहीं न कहीं ज़हर भर चुका होगा।

7. *अच्छी आदत* – कोई न कोई ऐसी हॉबी विकसित करें, जिसे करने में आपको मज़ा आता हो, मसलन गार्डेनिंग, पढ़ना, लिखना। फालतू बातों में समय बर्बाद करना ज़िंदगी के साथ किया जाने वाला सबसे बड़ा अपराध है। कुछ न कुछ ऐसा करना चाहिए, जिससे आपको खुशी मिले और उसे आप अपनी आदत में शुमार करके नियमित रूप से करें।

8. *ध्यान* – रोज सुबह कम से कम दस मिनट ध्यान करना चाहिए। ये दस मिनट आपको अपने ऊपर खर्च करने चाहिए। इसी तरह शाम को भी कुछ वक्त अपने साथ गुजारें। इस तरह आप खुद को जान पाएंगे।

9. *क्रोध से बचना* – कभी अपना गुस्सा ज़ाहिर न करें। जब कभी आपको लगे कि आपका दोस्त आपके साथ तल्ख हो रहा है, तो आप उस वक्त उससे दूर हो जाएं, बजाय इसके कि वहीं उसका हिसाब-किताब करने पर आमदा हो जाएं।

10. *अंतिम समय* – जब यमराज दस्तक दें, तो बिना किसी दुख, शोक या अफसोस के साथ उनके साथ निकल पड़ना चाहिए अंतिम यात्रा पर, खुशी-खुशी। शोक, मोह के बंधन से मुक्त हो कर जो यहां से निकलता है, उसी का जीवन सफल होता है।

*मुझे नहीं पता कि खुशवंत सिंह ने पीएचडी की थी या नहीं। पर इन्हें पढ़ने के बाद मुझे लगने लगा है कि ज़िंदगीbhi के डॉक्टर भी होते हैं। ऐसे डॉक्टर ज़िंदगी बेहतर बनाने का फॉर्मूला देते हैं । ये ज़िंदगी के डॉक्टर की ओर से ज़िंदगी जीने के लिए दिए गए नुस्खे है।* 🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏

SCIENTIFIC FOUNDATIONS OF HINDU RELIGION

*** हिन्दू धर्म के वैज्ञानिक मूलाधार **

बेटे ने माँ से पूछा – "माँ, मैं एक आनुवंशिक वैज्ञानिक हूँ | मैं अमेरिका में मानव के विकास पर काम कर रहा हूँ | विकास का सिद्धांत, चार्ल्स डार्विन, आपने उसके बारे में सुना है ?"

उसकी माँ उसके पास बैठी और मुस्कुराकर बोली – “मैं डार्विन के बारे में जानती हूँ, बेटा | मैं यह भी जानती हूँ कि तुम जो सोचते हो कि उसने जो भी खोज की, वह वास्तव में भारत के लिए बहुत पुरानी खबर है |“

“निश्चित रूप से माँ !” बेटे ने व्यंग्यपूर्वक कहा |

“यदि तुम कुछ होशियार हो, तो इसे सुनो,” उसकी माँ ने प्रतिकार किया | “क्या तुमने दशावतार के बारे में सुना है ? विष्णु के दस अवतार ?” बेटे ने सहमति में सिर हिलाया |
“तो मैं तुम्हें बताती हूँ कि तुम और मि. डार्विन क्या नहीं जानते हैं |

पहला अवतार था मत्स्य अवतार, यानि मछली | ऐसा इसलिए कि जीवन पानी में आरम्भ हुआ | यह बात सही है या नहीं ?” बेटा अब और अधिक ध्यानपूर्वक सुनने लगा |

उसके बाद आया दूसरा कूर्म अवतार, जिसका अर्थ है कछुआ, क्योंकि जीवन पानी से जमीन की ओर चला गया ‘उभयचर (Amphibian)’ | तो कछुए ने समुद्र से जमीन की ओर विकास को दर्शाया |

तीसरा था वराह अवतार, जंगली सूअर, जिसका मतलब जंगली जानवर जिनमें बहुत अधिक बुद्धि नहीं होती है | तुम उन्हें डायनासोर कहते हो, सही है ? बेटे ने आंखें फैलाते हुए सहमति जताई |

चौथा अवतार था नृसिंह अवतार, आधा मानव, आधा पशु, जंगली जानवरों से बुद्धिमान जीवों तक विकास |

पांचवें वामन अवतार था, बौना जो वास्तव में लंबा बढ़ सकता था | क्या तुम जानते हो ऐसा क्यों है ? क्योंकि मनुष्य दो प्रकार के होते थे, होमो इरेक्टस और होमो सेपिअंस, और होमो सेपिअंस ने लड़ाई जीत ली |" बेटा देख रहा था कि उसकी माँ पूर्ण प्रवाह में थी और वह स्तब्ध था |

छठा अवतार था परशुराम – वे, जिनके पास कुल्हाड़ी की ताकत थी, वो मानव जो गुफा और वन में रहने वाला था | गुस्सैल, और सामाजिक नहीं |

सातवां अवतार था मर्यादा पुरुषोत्तम श्री राम, सोच युक्त प्रथम सामाजिक व्यक्ति, जिन्होंने समाज के नियम बनाए और समस्त रिश्तों का आधार |

आठवां अवतार था जगद्गुरु श्री कृष्ण, राजनेता, राजनीतिज्ञ, प्रेमी जिन्होंने ने समाज के नियमों का आनन्द लेते हुए यह सिखाया कि सामाजिक ढांचे में कैसे रहकर फला-फूला जा सकता है |

नवां अवतार था भगवान बुद्ध, वे व्यक्ति जो नृसिंह से उठे और मानव के सही स्वभाव को खोजा | उन्होंने मानव द्वारा ज्ञान की अंतिम खोज की पहचान की |

और अंत में दसवां अवतार कल्कि आएगा, वह मानव जिस पर तुम काम कर रहे हो | वह मानव जो आनुवंशिक रूप से अति-श्रेष्ठ होगा |

बेटा अपनी माँ को अवाक होकर देखता रहा | “यह अद्भुत है माँ, भारतीय दर्शन वास्तव में अर्थपूर्ण है |“

पुराण अर्थपूर्ण हैं | सिर्फ आपका देखने का नज़रिया होना चाहिए धार्मिक या वैज्ञानिक |
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